Sunday, July 14, 2024

विभीषण की बेटी से क्यों डरता था रावण, सीता मां की करती थीं रक्षा, अब यहां…

Who Was Vibhishana’s Daughter: रामायण कथा में कुछ ऐसे खास पात्र हैं जिनके बारे में हम ज्यादा नहीं जानते हैं. उनमें से एक विभीषण की पुत्री भी हैं. रामायण में उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती है, लेकिन विभिन्न भाषाओं में लिखे गए रामायण में उनका उल्लेख किया जाता है, जिसे आपको भी जानना जरूरी है. जरूरी इसलिए भी, क्योंकि रावण भी इनसे डरता था.

विभीषण की बेटी का वर्णन बहुत सुंदर और अच्छे विचारों वाली राक्षसी के रूप में किया गया है. कहा गया है कि राक्षस कुल में जन्म लेने वाली विभीषण की बेटी बहुत बुद्धिमान थीं. इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि भले ही रावण बहुत बहादुर था और वह किसी से नहीं डरता था, लेकिन असल में वह विभीषण की बेटी से खौफ में रहता था. आइए जानते हैं कि विभीषण की बेटी कौन थीं…

कौन थी विभीषण की बेटी?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, विभीषण की बेटी का नाम त्रिजटा था. इस हिसाब से वह रावण की भतीजी थीं.  त्रिजटा की मां का नाम शरमा था. बता दें कि जब माता सीता ने रावण को उसके महल के अंदर रहने से इनकार किया था, तब उनके कैद का स्थान अशोक वाटिका रखा गया. इस दौरान रावण ने राक्षसियों को उनके रक्षक के रूप में नियुक्त किया और उन्हें सख्त निर्देश दिया. सभी राक्षसियां माता सीता को रावण से विवाह करने के लिए मनाने लगीं, तभी त्रिजटा ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने सीता के प्रति ऐसे व्यवहार के लिए अपनी साथी राक्षसियों को खूब खरी खोटी सुनाई और माफी मांगने को कहा.

भविष्य देख चुकी थीं त्रिजटा
त्रिजटा ने अपना साथियों और माता सीता को अपना भविष्यसूचक सपना सुनाया था, जहां उन्होंने देखा कि लंका एक वानर यानी हनुमान द्वारा जलाया जा रहा है और भगवान राम सीता को बचाने के लिए आ रहे हैं. त्रिजटा राक्षसियों से कहती है कि वे सीता को परेशान करने के बजाय उनकी सेवा करें. चूंकि त्रिजटा सबसे बड़ी थीं, इसलिए सभी उनकी बात भी मानती थीं. 

त्रिजटा से क्यों डरता था रावण
त्रिजटा भले ही अशोक वाटिका में रहती थीं, लेकिन वह हथियारों और जादुई क्षमताओं के बारे में बहुत कुछ जानती थीं. अपनी दिव्य शक्ति से त्रिजटा माता सीता को हर घटना की जानकारी देती रहती थीं. त्रिजटा बाहर से जितनी सामान्य दिखती थीं वह बिल्कुल इसके विपरीत थीं. रावण त्रिजटा की दिव्य शक्तियों के बारे में जानता था, इसीलिए वह उनसे डरता भी था. वह जब भी बोलती थी, जो कहती थी वह हमेशा सच होता था. रावण यह भी जानता था कि त्रिजटा भगवान विष्णु से प्रेम करती थी और उनकी पूजा करती थी.

बनारस में है माता त्रिजटा का मंदिर
माता सीता ने त्रिजटा को वरदान दिया था कि कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन उन्हें भी देवी स्वरूप में पूजा जाएगा. रावण के वध के बाद जब माता सीता वापस लौट रही थीं, तो उन्होंने त्रिजटा को काशी में विराजमान होने की बात कहकर उन्हें एक दिन की देवी का वरदान दिया था. बस तब से उनकी पूजा होती चली आ रही है.

चढ़ता है मूली और बैंगन
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो भी कार्तिक पूर्णिमा के अगले दिन त्रिजटा राक्षसी की पूजा करता है,  वह हमेशा उनकी रक्षा करती हैं. यही वजह है कि यहां साल में एक दिन भक्तों की भीड़ लगी होती है और भक्त मूली-बैंगन का भोग लगाकर विशेष रूप से उनकी पूजा करते हैं.

(Disclaimer: यह खबर मान्‍यताओं पर आधारित है. न्‍यूज़18 इसकी पुष्टि नहीं करता)

Tags: Dharma Aastha, Ramayan, Sita devi

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